Sale!

Jeevancharya Vigyan Code 1955

34.00

+ Free Shipping

Jeevancharya Vigyan (Code 1955)

Categories: ,

कल्याणकामी व्यक्ति को शास्त्र से सम्बन्धित जीवनचर्या (जन्मसे लेकर मृत्युपर्यन्त) तथा दैनिकचर्या (प्रात:जागरण से लेकर रात्रि-शयनपर्यन्त) चलानी चाहिये। पूर्वजन्म के भी शुभ-अशुभ संस्कार सूक्ष्म शरीर तथा कारण-शरीर के द्वारा अगले जन्म में प्रारब्ध बनकर साथ रहते हैं।

  • Grahasth Jivan me Rahne Ki Kalaa
  • Publisher ‏ : ‎ Geetapress, Gorakhpur
  • Dimensions ‏ : ‎ 21 x 14 x 2 cm
  • Country of Origin ‏ : ‎ India
  • Book Code : 1955
  • Book : Jeevancharya Vigyan
  • Language : Hindi and Sanskrit
  • Number Of Pages : 320

Reviews

There are no reviews yet.

Be the first to review “Jeevancharya Vigyan Code 1955”

Your email address will not be published.

Shopping Cart